नई दिल्ली | दिसंबर 2025 – सिंधु मिश्रा के मार्गदर्शन में आयाम इंस्टीट्यूट ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स द्वारा प्रस्तुत कलैमामणि बाला देवी चंद्रशेखर की नवीन भरतनाट्यम नृत्य-नाटिका ‘मौली – ए टाइमलेस ट्रेडिशन’ राजधानी दिल्ली में एक गहन आध्यात्मिक और कलात्मक अनुभव के रूप में सामने आई। यह प्रस्तुति न केवल शास्त्रीय नृत्य की तकनीकी सुदृढ़ता का प्रमाण थी, बल्कि भक्ति और मानवीय समानता के शाश्वत मूल्यों को भी प्रभावशाली ढंग से उजागर करती है।
बाला देवी चंद्रशेखर द्वारा परिकल्पित, कोरियोग्राफ और प्रस्तुत यह नृत्य-नाट्य पंढरपुर परंपरा और वारकरी संप्रदाय की आध्यात्मिक चेतना पर आधारित है। भारतीय दर्शन, मंदिर स्थापत्य और शास्त्रीय साहित्य पर गहन शोध के आधार पर रची गई यह कृति दर्शकों को आलंदी और देहू से पंढरपुर तक की 250 किलोमीटर लंबी वारी यात्रा का सांकेतिक अनुभव कराती है, जिसे मंच पर ‘चलता हुआ तीर्थ’ कहा जा सकता है।
भरतनाट्यम की सशक्त भाषा में प्रस्तुत इस यात्रा में चंद्रभागा नदी की कोमलता, पांडुरंग-विठ्ठल की दिव्य उपस्थिति और वारकरी भक्तों की सामूहिक आस्था सजीव हो उठती है। बाला देवी का संयमित अभिनय और मूर्तिकला-सदृश मुद्राएं कथा को शब्दों से आगे ले जाकर सीधे अनुभूति के स्तर पर स्थापित करती हैं।
इस प्रस्तुति का केंद्रबिंदु है ‘मौली’—ममता की प्रतीक, दिव्य माँ और वह करुणामयी शक्ति जो सभी को समान भाव से अपनाती है। नृत्य-नाटिका यह संदेश देती है कि भक्ति के मार्ग पर न कोई ऊंचा है, न नीचा—यहां सभी समान हैं। दर्शक केवल दर्शक नहीं रहते, बल्कि ‘अंतर-यात्री’ बनकर इस आध्यात्मिक यात्रा का हिस्सा हो जाते हैं।
दिल्ली में इस प्रस्तुति को लाने के उद्देश्य पर बोलते हुए आयाम इंस्टीट्यूट ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स की संस्थापक-निदेशक सिंधु मिश्रा ने कहा,
“मैं चाहती थी कि दिल्ली कुछ बिल्कुल अलग देखे—एक ऐसी शास्त्रीय नृत्यांगना, जो अमेरिका में रहते हुए भी भारतीय परंपरा में इतनी गहराई से रची-बसी हैं। बाला देवी चंद्रशेखर की कला वैश्विक दृष्टि और भारतीय मूल्यों का अद्भुत संगम है।”
संगीत, काव्य और दृश्य संयोजन ने प्रस्तुति की गंभीरता और भावनात्मक प्रभाव को और सशक्त किया। पूरी रचना में शास्त्र, मूर्तिकला, संगीत और साहित्य का संतुलित समावेश दिखाई देता है, जो बाला देवी चंद्रशेखर की शोध-आधारित कलात्मक पहचान को रेखांकित करता है।
प्रसिद्ध नृत्यविद् डॉ. पद्मा सुब्रह्मण्यम की वरिष्ठ शिष्या, बाला देवी चंद्रशेखर वर्तमान में अमेरिका के प्रिंसटन स्थित हैं और एशियाई परफॉर्मिंग आर्ट्स में प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के रूप में कार्यरत हैं। 35 से अधिक देशों में प्रस्तुतियां दे चुकीं बाला देवी ने भरतनाट्यम को इतिहास, दर्शन और नैतिक मूल्यों से जोड़ने वाली एक सशक्त अभिव्यक्ति प्रदान की है।
आयाम इंस्टीट्यूट ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स की यह प्रस्तुति यह सिद्ध करती है कि शास्त्रीय नृत्य समय और भूगोल की सीमाओं से परे जाकर आज भी उतना ही प्रासंगिक है—जहां परंपरा जीवित है, और भक्ति सबको समान रूप से जोड़ती है।