नई दिल्ली। भारतीय सांस्कृतिक विरासत की समृद्ध परंपरा को मंच पर सजीव करने की कड़ी में आयाम इंस्टीट्यूट ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स एक और विशिष्ट प्रस्तुति लेकर आ रहा है। ‘माउली – ए टाइमलेस ट्रेडिशन’ शीर्षक से प्रस्तुत यह विशेष भरतनाट्यम संध्या सुप्रसिद्ध नृत्यांगना एवं विदुषी कलैमामणि बाला देवी चंद्रशेखर की भावपूर्ण प्रस्तुति होगी।
यह नृत्य-नाट्य महाराष्ट्र की पवित्र पंढरपुर परंपरा पर केंद्रित है, जहां भगवान पांडुरंग–विठ्ठल की भक्ति सदियों से जन-जन की आस्था का केंद्र रही है। शोधपरक कोरियोग्राफी, सशक्त कथ्य और शास्त्रीय सौंदर्य से समृद्ध यह प्रस्तुति विठ्ठल भक्ति की उस आध्यात्मिक विरासत को उजागर करती है, जिसने संत परंपरा और लोक आस्था को वैश्विक पहचान दी।
‘माउली’ के माध्यम से दर्शक केवल एक नृत्य प्रस्तुति ही नहीं, बल्कि भक्ति, दर्शन और परंपरा से जुड़ी एक गहन आध्यात्मिक यात्रा का अनुभव करेंगे। यह कार्यक्रम 18 दिसंबर को सायं 6:30 बजे, त्रिवेणी कला संगम, तानसेन मार्ग, नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा।
कला और संस्कृति से प्रेम रखने वाले सभी रसिकों के लिए यह संध्या भारतीय आध्यात्मिक धरोहर से जुड़ने का एक दुर्लभ अवसर होगी।