अगर आप एजुकेशन सेक्टर में कदम रखना चाहते हैं, तो सबसे बड़ा सवाल यही होता है— “क्या प्री-स्कूल फ्रेंचाइज़ लेना बेहतर है, या अपने नाम से नया स्कूल शुरू करना?”
आज के समय में प्री-स्कूल इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है। कम निवेश, कम रिस्क और बेहतर रिटर्न—इसी वजह से कई लोग इस क्षेत्र की ओर आकर्षित होते हैं। लेकिन सही निर्णय तभी होगा जब आप दोनों विकल्पों को गहराई से समझें। यहाँ हम इन दोनों मॉडलों का तुलनात्मक विश्लेषण कर रहे हैं, ताकि आप अपने लिए बेस्ट फैसला ले सकें।
1. प्री-स्कूल फ्रेंचाइज़: क्या मिलता है और क्या चुकाना पड़ता है?
प्री-स्कूल फ्रेंचाइज़ आपको एक तैयार ब्रांड, प्रूव्ड सिस्टम और मार्केटिंग सपोर्ट देती है। शुरुआती स्तर पर यह कई झंझटें खत्म कर देती है।
✔ फ्रेंचाइज़ के प्रमुख फायदे:
ब्रांड वैल्यू – पेरेंट्स पहले से जानते हैं, इसलिए एडमिशन पाना आसान।
तैयार कोर्स करिकुलम – आपको खुद डिजाइन नहीं करना पड़ता।
टीचर ट्रेनिंग और सेटअप सपोर्ट – इंटीयरियर, क्लासरूम सेटअप, टीचिंग मटेरियल सब तैयार।
मार्केटिंग और एडमिशन गाइडेंस – शुरुआत से ही सही दिशा।
कम रिस्क – बिजनेस मॉडल पहले से टेस्टेड होता है।
✘ फ्रेंचाइज़ के नुकसान:
फ्रेंचाइज़ फीस + रॉयल्टी – हर साल/महीना पेमेंट।
क्रिएटिव फ्रीडम कम – आप अपने हिसाब से बदलाव नहीं कर सकते।
लोकेशन और ऑपरेशन गाइडलाइन्स कड़े – हर चीज़ फ्रेंचाइज़र के हिसाब से करनी होती है।
2. अपना खुद का प्री-स्कूल: पूरी आज़ादी, लेकिन पूरी ज़िम्मेदारी भी
अपने नाम से स्कूल शुरू करना आपको एक यूनिक आइडेंटिटी देता है, और लॉन्ग-टर्म में सबसे ज्यादा प्रॉफिट भी यही देता है। लेकिन शुरुआत में मेहनत और रिस्क दोनों बढ़ जाते हैं।
✔ अपना ब्रांड खोलने के फायदे:
नो रॉयल्टी, नो फ्रेंचाइज़ फीस – जितना कमाएँ, सब आपका।
पूरी क्रिएटिव फ्रीडम – करिकुलम से लेकर इंटीयरियर तक, अपनी सोच लागू करें।
ब्रांड वैल्यू खुद बना सकते हैं – भविष्य में चेन भी खोल सकते हैं।
लो बजट में शुरुआत संभव – जरूरी नहीं कि बहुत महंगा सेटअप हो।
✘ अपने स्कूल के नुकसान:
कोई तैयार सिस्टम नहीं – सब कुछ खुद प्लान करना पड़ेगा।
पेरेंट्स का भरोसा जीतने में समय – शुरुआत में एडमिशन पाना मुश्किल हो सकता है।
करिकुलम तैयार करना चुनौतीपूर्ण – एक्सपर्ट की जरूरत पड़ सकती है।
मार्केटिंग की पूरी जिम्मेदारी – ब्रांड नाम बनाने में समय और पैसा दोनों लगता है।
3. निवेश की तुलना: कौन सा विकल्प ज्यादा फायदेमंद?
पैरामीटर फ्रेंचाइज़ अपना स्कूल
इंवेस्टमेंट ₹8–20 लाख ₹3–10 लाख (डिपेंड ऑन लोकेशन)
मार्केटिंग सपोर्ट मिलता है खुद करना होता है
प्रॉफिट मार्जिन 20–40% 60–80%
रिस्क लेवल कम मध्यम–उच्च
ऑपरेशन कंट्रोल कम पूरा
4. किसे कौन सा मॉडल चुनना चाहिए?
✔ फ्रेंचाइज़ चुनें अगर—
आपको एक प्रूव्ड सिस्टम चाहिए
आप जल्दी एडमिशन और फास्ट ROI चाहते हैं
आप बड़ी गाइडेंस और सपोर्ट चाहते हैं
✔ अपना स्कूल खोलें अगर—
आपका बजट सीमित है
आप लॉन्ग-टर्म ब्रांड बिल्डिंग चाहते हैं
आपके पास क्रिएटिव आइडियाज़ हैं
आपको एजुकेशन सेक्टर की समझ है
आप अधिक प्रॉफिट और पूरी कंट्रोल चाहते हैं
5. आखिर सबसे बेहतर क्या है?
अगर आप तेजी से शुरू करना चाहते हैं और रिस्क कम रखना चाहते हैं तो फ्रेंचाइज़ मॉडल बढ़िया है। लेकिन अगर आपका लक्ष्य लंबी अवधि में अपनी पहचान बनाना, अधिक प्रॉफिट कमाना और ब्रांड स्थापित करना है—तो अपना स्कूल खोलना सबसे सर्वोत्तम विकल्प है।
“शुरुआत आसान चाहिए या भविष्य विशाल?” – यही सवाल आपको चुनना होगा|
दोनों मॉडल अपने-अपने तरीके से बेहतरीन हैं। इस आपके अनुभव, बजट, लोकेशन और लक्ष्य पर निर्भर करती है।
अगर स्मार्ट तरीके से प्लानिंग की जाए, तो प्री-स्कूल बिजनेस आपको महीने के 1 लाख से भी ज्यादा कमाई आसानी से दे सकता है। और यही वजह है कि आज के युवा और महिलाएँ इस बिजनेस में तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं।